क्या आपको पता है कि suicide से मरने वाली females से 3-4 गुना ज़्यादा suicide से मरने वाले males की संख्या है। दुनिया में हर 11 minute में एक इंसान suicide से मरता है। और WHO के मुताबिक़ दुनिया भर के total suicide cases में 70-80% males होते हैं। असल में females males से ज़्यादा suicide attempt करती हैं, लेकिन suicide से मरते ज़्यादा males हैं। ऐसा क्यों है, जानने के लिए पूरा video देखिए, मैं आगे ये भी बताऊंगी।आख़िर males क्यों suicide करते हैं?इसके पीछे हमारा समाज और उसकी सोच है।हमारे society में आदमियों के लिए सदियों से चली आ रही है एक धारणा, "मर्द बनो", "तुम मर्द हो", "तुम्हें बहुत strong होना चाहिए", "मर्द रोते नहीं हैं", और सबसे famous dialogue जो हम सबके favourite Amitabh Bachchan जी का है… बिल्कुल सही समझे हैं…"मर्द को दर्द नहीं होता"।Society के इन सब expectations की वजह से आदमी खुल के बात नहीं कर पाते, किसी से अपनी problem अपना दर्द share नहीं पाते, क्योंकि ऐसे करने से वो मर्द नहीं रहेंगे न… यहाँ तक कि घर में कोई माँ भी अपनी बेटी से ज़्यादा बात करती है अपने बेटे के मुक़ाबले, जिसके कारण उनको अपनी बेटी की problem तो समझ आ जाती है, लेकिन बेटे की problem काफ़ी कम पता चलता है। Actually males को physically strong होने के साथ emotionally strong होने को भी कहा जाता है, जिसके कारण males बहुत कम expressive होते हैं, लेकिन वो भी तो इंसान हैं, उसे भी stress तो होती होगी, रोने का मन करता होगा। ये सब के कारण males में mental problems जैसे depression, anxiety develop होती है और suicide का risk बढ़ जाता है।किन कारणों से males suicide करते हैं?Suicide करने का सबसे common reason relationship issues, heartbreak, financial issues और unemployment यानी बेरोज़गारी और ये सारे problems किसी से share न कर पाना या फिर किसी से support न मिलना पाया गया है।अब बात करते हैं, क्यों suicide से males ज़्यादा मरते हैं?World Health Organisation (WHO) और CDC की report के मुताबिक़, males बहुत जानलेवा तरीके अपनाते हैं suicide करने का। Suicide के death cases में 50% males ने किसी हथियार का use किया है जैसे rifle या gun से ख़ुद को shoot कर लिया हो। इसके पीछे का reason ये है कि males में दर्द सहने की क्षमता ज़्यादा होती है, जिसके कारण वो ऐसा क़दम उठाते हैं कि उनको बचाने का मौक़ा तक नहीं मिलता। इसके अलावा males ख़ुद को फांसी लगा लेते हैं, तो कभी ज़हर खा लेते हैं, या किसी medicine का overdose लेके भी suicide attempt करते हैं।इस video से एक ही message सब तक पहुँचाना चाहती हूँ कि please मर्दों को भी इंसान समझ के उनको support और care दीजिए, उनके emotions की क़दर करें, उनकी problems को सुनें और उनकी help करें। कोई भी इतना strong नहीं होता कि उसे किसी की support की ज़रूरत ही न पड़े।Source:-1. https://www.cdc.gov/suicide/facts/data.html 2. https://www.who.int/data/gho/data/themes/mental-health/suicide-rates
आज के समय में स्कूल के बच्चे भी अपना खुद का मोबाइल फोन लेकर घूम रहे हैं ताकि वह अपने दोस्तों के साथ बात कर सकें और social media account जैसे की facebook, whatsapp, instagram आदि पर active रह सकें। लेकिन याद रखेंलोगों से बातचीत करने के लिए जितने ज्यादा social platforms होंगे उतना ही ज्यादा bully होने का risk होगा। सिर्फ स्कूल के बच्चे ही नहीं, कोई भी इसका निशाना बन सकता है।यह किस प्रकार का bully करने का तरीका है?Digital platforms के उपयोग से किए गए bullying को cyberbullying कहते हैं। Cyberbullying का उद्देश्य होता है किसी को डराना या शर्मिंदा करना।Online कोई कैसे bully कर सकता है?Social media पर target की शर्मनाक photos या videos पोस्ट करकेTarget को अपमानजनक या धमकी वाले messages, photos या videos भेज करTarget के account से दूसरों को गलत messages भेज करCyberbullying स्वास्थ्य स्कूल लंबे समय तक ऐसे प्रभावित करता है:Target हर समय परेशान, शर्मिंदा, डरा हुआ या क्रोधित महसूस कर सकता है। इससे वह मानसिक रूप से प्रभावित होता है।Target को शर्म महसूस हो सकती है या उनकी पसंदीदा चीज़ों में रुचि कम हो सकती है। इससे वह भावनात्मक रूप से प्रभावित होता है।Target को हमेशा थकान महसूस हो सकती है या पेट में दर्द और सिरदर्द का अनुभव हो सकता है। इससे वह शारीरिक रूप से प्रभावित होता है।Cyberbullying मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?Cyberbullying का मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह व्यक्ति को कुछ ऐसा महसूस करवाता है:शर्मिंदा, घबराया हुआ, चिंतित और असुरक्षितदोस्तों और परिवार से दूरी बना लेने वालाअपने बारे में नकारात्मक विचार रखने वालाउन चीज़ों के लिए दोषी महसूस करना जो उसने कीं या नहीं कींअकेलापन या अभिभूत महसूस करने वालाबार-बार सिरदर्द या पेट में दर्द होनाकाम करने की इच्छा ना होनायह सब मिलकर नकारात्मक भावनाओं और विचारों को कायम रख सकते हैं जो किसी के मानसिक स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव डाल सकते हैं।कौन मदद कर सकता ?इस समय target के लिए मदद मांगना बहुत जरूरी है। यह लोग मदद कर सकते हैं:कोई विश्वसनीय adult/ माता-पिता/ परिवार के सदस्यस्कूल में counsellor या sports teacherHelpline numbersसबसे पहली बात, bully करने वाले को ब्लॉक करें और रिपोर्ट करें। सोशल मीडिया कंपनियां सभी को सुरक्षित रखने के लिए responsible हैं।Source:- https://www.unicef.org/end-violence/how-to-stop-cyberbullying
बच्चों पर bullying के के हानिकारक परिणाम हो सकते हैं। सिर्फ शारीरिक ही नहीं, यह उनके भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।क्या हमें बच्चे पर छोड़ देना चाहिए कि वह खुद manage करें?आपके बच्चे को सुरक्षित रहने का अधिकार है। हां, यह महत्वपूर्ण है कि हम उन्हें स्वतंत्र बनाएं लेकिन माता-पिता के रूप में हमें अपने बच्चे की भलाई के लिए सही समय पर जरूर बोलना चाहिए।आप अपने बच्चे की मदद कैसे कर सकते हैं?अपने बच्चों को bullying के बारे में शिक्षित करें: यदि आपका बच्चा पहले से जानता होगा कि bullying क्या है, तो वह इसे आसानी से पहचानने में सक्षम होगा।अपने बच्चों से बार-बार और खुलकर बात करें: जब माता-पिता अपने बच्चों से bullying के बारे में खुलकर बात करते हैं, तो वे भी अपने अनुभव बांटना आसान महसूस करते हैं। इसलिए, उनसे न केवल उनकी पढ़ाई के बारे में, बल्कि उनकी भावनाओं के बारे में भी बात करें।अपने बच्चे को सहारा बनने के लिए प्रोत्साहित करें: आपका बच्चा समर्थन देकर, bullying पर सवाल उठाकर अपने साथियों को bully होने से रोक सकता है। ऐसा तभी होगा जब उन्हें पता होगा कि उनके पास आपका पूरा समर्थन है।अपने बच्चे का आत्मविश्वास बनाएं: अपने बच्चे को समुदाय मेंकुछ गतिविधि संबंधित कक्षाओं में डालें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, साथ ही उनके पास अपने जैसे interest वाले मित्रों का एक group बन जाता है।एक अच्छे रोल मॉडल बनें: हमेशा दूसरे बच्चों और बड़ों के साथ अच्छे से पेश आएं और जब किसी के साथ कुछ गलत हो रहा हो तो उसके खिलाफ बोलें क्योंकि आपके बच्चे आपके व्यवहार से यही सीख रहे हैं।उनकी online दुनिया का हिस्सा बनें: आजकल हर बच्चा online बहुत कुछ कर रहा है। उन सभी platforms से परिचित होना शुरू करें जिनका उपयोग आपका बच्चा करता है। अपने बच्चों को समझें और उन्हें आगाह करें कि उन्हें आगे किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।उन्हें bullying के बारे में शिक्षित करना पहला कदम है। तो आइए हम सब मिलकर पहले से ही शिक्षित करने और अपने बच्चों को इस bullying की दुनिया से बचाने का संकल्प लें।Source:- https://www.unicef.org/parenting/child-care/bullying
Parenthood: क्या यह आसान है या मुश्किल? माता-पिता के लिए अलग-अलग समय पर यह एक अलग एहसास हो सकता है, किंतु बच्चों के लिए माता-पिता ही सब कुछ होते हैं। वह अपने माता-पिता को एक देवदूत की तरह देखते हैं जो उनके लिए सब कुछ सुलझा सकते हैं।एक parent होने के नाते मैं आपकी स्थिति को पूरी तरह समझती हूं और यह भी जानती हूं कि मेरी तरह सभी मां-बाप के लिए अपने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से ऊपर कुछ भी नहीं है।यह 5 टिप्स आपको अपने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने में मदद करेंगी:बच्चों को सुने और उन्हें प्रोत्साहित करें: सुनिश्चित करें कि बच्चे हमेशा आपसे अपने विचार और भावनाओं के बारे में आसानी से बात कर सके। उनकी बातों का सकारात्मक (positive) रूप से जवाब दें। उन पर हमेशा विश्वास करें एवं धैर्य रखें।बच्चों पर पूरा ध्यान दें: बच्चों से बात करते समय उनसे आंखों का संपर्क बनाए रखें। उसे दौरान अपने मोबाइल या टीवी पर ध्यान बिल्कुल ना दे।बच्चों की रुचि को अपनी रुचि बनाएं: बच्चों के साथ उनके पसंदीदा टीवी शो संगीत या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के बारे में बात करें। खाना पकाने या योग जैसी चीज उनके साथ में करें। इससे आपको अपने बच्चों के करीब जाने में मदद मिलेगी।बच्चों को पुरस्कार दें एवं प्रोत्साहित करें: बच्चों के कुछ अच्छा करने पर हमेशा उनकी प्रशंसा करें। उनके लिए एक सकारात्मक role model बनें। उन्हें बताएं कि भावनात्मक होने में कुछ भी गलत नहीं है, उन्हें बताएं कि प्यार, गुस्सा, खुशी और दुख इन सभी को जब भी वह महसूस करें, उसे आपके साथ व्यक्त जरूर करें।पारिवारिक नियम बनाएं: आपसी समझ से तय किए गए नियम बच्चों को सुरक्षित महसूस कराते हैं। नियमों के पालन पर बातचीत करने से चिंता, गुस्सा और अविश्वास कम हो सकता है। बच्चों के साथ टीम बनाकर कुछ कार्य करें जिससे आप दोनों का समय साथ में व्यतीत हो सके।अक्सर देखा गया है कि बहुत सी परेशानियां तो सबके साथ बैठने और मिलकर समस्याओं का समाधान ढूंढने से ही हल हो जाती है। कभी-कभी परेशानियां उतनी बड़ी होती नहीं है जितना हम उन्हें बना देते हैं। आई आज अपने आप को बदले और अपने बच्चों को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करें।
आज के समय में, हर किसी को टेंशन है, parents को family और finances की टेंशन, तो बच्चों को assignment पूरी करने की टेंशन, किसी को exams पास करने की टेंशन है तो, किसी को अपने job की टेंशन है, और जब कोई इंसान इन सब टेंशन को easily tackle नहीं कर पाता तो, यही tension उसके gussa, frustration, या नाउम्मीद ka karan ban jata है।अब यही टेंशन जब दिमाग और शरीर दोनों पे हावी होने लगता है तो उसे, stress का नाम दे दिया जाता है।वैसे कभी-कभी छोटी-मोटी stress होनी भी चाहिए, इससे काफी सारे काम जैसे assignment या project submit करना हो, तो time पे हो जाते हैं। लेकिन अगर यही stress ज्यादा दिनों तक होने लग जाए तो, फिर आपके health के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। इस बात को ऐसे ही ignore मत कीजिए, यह आपके ही health और benefit के लिए है। आइए, detail में समझते हैं। जब भी आपको stress होता है, तो आपकी body में एक hormone जिसका नाम cortisol है, वो release होने लगता है।Cortisol को stress hormone भी कहा जाता है। यह hormone आपके brain को काफी alert कर देती है, body के muscles को शक्ति बना देती है, और साथ ही आपके heart rate में भी changes होने लगते हैं। ये सब आपकी body का खुद का defense mechanism है उस stress से deal करने का, लेकिन जब ये stress higher stages में पहुँच जाता है, तो आपको बहुत सारी बीमारियाँ हो सकती हैं जैसे:Obesity या मोटापाDiabetesHigh blood pressureHeart related problemsDepressionAnxietyAcne breakoutsMenses problem, और भी कई सारी बीमारियों को और severe भी बना सकता है।अब सवाल आता है कि stress हो रहा है ये पता कैसे चलेगा?जब भी आपको stress होता है, तो आपकी body कुछ ऐसे signs देती है जो आपको आगे आने वाली health risk से बचा सकती है, जैसे कि:DiarrheaConstipationचीजों को जल्दी भूल जानाबार-बार body pain होनागर्दन का अकड़ जानाHeadache होना,हर वक्त थका-थका महसूस करनानींद ढंग से ना आनाया एकदम ज्यादा सोनाWeight बढ़ जाना या घटने लगनाऔर शराब या किसी दवाई के सहारे खुद को शांत feel कराना।source: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3341916/ https://ijip.in/wp-content/uploads/2022/09/18.01.128.20221003.pdf
बिना शराब पिए हैंगओवर हुआ है कभी? मेरा मतलब वही same हैंगओवर वाली फीलिंग, इमोशनल होना, शरीर और दिमाग दोनों, थक के काम कम ना कर रहे हो? समझ नहीं आया.. आइए समझते हैं!क्या कभी ऐसा हुआ है, कि घर में किसी से बहस हो गई या फिर बहुत बुरा जॉब इंटरव्यू हुआ हो? और ठीक इस अनुभव के बाद आपको बहुत ज्यादा थकान महसूस होने लगती है, आप इमोशनल हो जाते हो, सर में भरापन, और दिमाग काम करना बंद कर देता है, बस जी करता है, कि बेड में पड़े रहें।ऐसा काफी लोगों के साथ होता है, लेकिन इसका क्या नाम है किसी को पता नहीं होता। इस कंडीशन को Emotional Hangover कहते हैं, जिसका असर बिलकुल शराब के बाद वाले हैंगओवर जैसे होता है।तो, Emotional Hangover क्यों होता है?Emotional Hangover तब होता है, जब आप ऐसे किसी situation में आते हैं, जहाँ आपका emotion, या feelings, trigger होती है जैसे कि:फैमिली में या किसी क्लोज पर्सन से बहस हो गई हो, काम का stress हो, लाइफ में बड़े changes हुए हों जैसे, नई नई शादी होना, job shift होना, एक शहर से दूसरे शहर में move होना या फिर किसी अपने की death हो गई हो।ऐसी कंडीशन में stress का level बहुत हाई हो जाता है, और आपके दिमाग में stress hormone यानी cortisol बहुत बढ़ जाता है। और जब आप इस कंडीशन से recover होने के लिए आपके body और brain को time चाहिए होता है, जिसके कारण आपको थकान, चिढ़चिढ़ापन, या सोचने समझने में दिक्कत आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।ये एक normal तरीका है आपके body का आपसे time मांगने का, ताकि वो खुद को वापस से संभाल पाए और ठीक से सब काम कर सके।source: https://www.sciencedaily.com/releases/2016/12/161226211238.htm https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S030646032300014X
Emotional hangover, यानि कोई ऐसी घटना जिसका असर दिमाग और शरीर दोनों पे हो, और आपको थका थका या चिढ़चिढ़ा महसूस होने लगे, जैसे किसी अपने से बहस हो जाना, नई जॉब का स्ट्रेस या किसी की डेथ हो जाना। इमोशनल हैंगओवर का असर स्ट्रेस और डिप्रेशन से काफी मिलता-जुलता है। ये हैंगओवर बिलकुल शराब पीने के बाद वाले हैंगओवर जैसा ही होता है।Emotional hangover का पता लगाने के लिए, ये लक्षण का ध्यान दें: रात को अच्छे से सोने के बाद भी दिन में थका थका महसूस करना। शरीर में अकड़न या दर्द होना। सिर दर्द या सिर चकराना उल्टी आना किसी भी काम पे ध्यान न दे पाना चिढ़चिढ़ापन उदास होना रोना आना किसी से बात न करना या फिर घबराहट होनाअगर आपको भी emotional hangover हुआ है तो, उससे ठीक करने के लिए ये 5 तरीके अपनाएँ:हल्का खाना खाएँ और पानी पीते रहें।Exercise करें या कोई creative काम करें जैसे painting, या guitar बजाना।अगर फील हो तो, थोड़ा और सो लीजिए ताकि आपको अच्छा फील हो।बाहर, किसी natural जगह पे जाइए, और वहाँ टाइम स्पेंड कीजिए।जो आपका मन करे वो काम कीजिए और अपनों से बात कीजिए, प्रॉब्लम शेयर कीजिए। आपको अच्छा लगेगा और emotional hangover भी खत्म हो जाएगा।source: https://www.sciencedaily.com/releases/2016/12/161226211238.htm https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S030646032300014X
काफी सारे फेमस सेलिब्रिटी जैसे दीपिका पादुकोण, शाहरुख खान, करण जौहर, या हनी सिंह को डिप्रेशन हुआ था। लेकिन हैरानी तब हुई जब स्टार किड्स जैसे, सुहाना खान, शाहीन भट्ट, और इरा खान को डिप्रेशन हुआ, वो भी काफी कम उम्र में।तो क्या बच्चों में भी डिप्रेशन हो सकता है?असल में, बच्चों में काफी नॉर्मल होता है, कभी कभी शांत रहना, बात बात पे गुस्सा करना, चिल्लाना, इरिटेट हो जाना, और फिर कुछ देर बाद ही आपका बच्चा वापस खेलने लग जाता है।लेकिन कभी कभी बच्चे ज्यादा शांत रहने लगते हैं, यही चिड़चिड़ापन ज्यादा दिखने लगता है। और जब ये सारे लक्षण 1 हफ्ते से ज्यादा दिखने लगते हैं, तो आपका बच्चा ठीक नहीं है, उसे डिप्रेशन हो सकता है।Research के मुताबिक, करीब 3% बच्चे और 8% teenagers को डिप्रेशन होता है।बच्चों में डिप्रेशन होने के कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे कि: Family history या genetic history यानि family में किसी को especially मम्मी पापा में से किसी को पहले डिप्रेशन की history रही हो, stress देने वाली बातें जैसे कि किसी अपने की death हो जाना, या parents का divorce हो जाना, या फिर कोई physical injury या बीमारी होना, या फिर school में बाकी बच्चों के द्वारा bully होना। ये सब चीजें कारण हो सकती हैं आपके बच्चे में डिप्रेशन होने का।अब सवाल आता है, कि पता कैसे लगाएं कि आपके बच्चे को डिप्रेशन हुआ है:बच्चों में अगर डिप्रेशन है, तो ये सारे लक्षण दिखाई देंगे जैसे कि:आपका बच्चा पहले से ज्यादा sad या irritated रहने लग सकता है यानी उसको mood changes हो रहे हैं। पहले जिन कामों में मजा आता था अब वो सब में उसे बिल्कुल interest नहीं आता है। Energy level एकदम कम हो जाना, या बहुत ज्यादा थकान होना। आपका बच्चा negative बातें करने लग जाए, जैसे मैं अच्छा नहीं हूँ, मेरा कोई दोस्त नहीं है, या फिर मैं पढ़ने में अच्छा नहीं हूँ। आपका बच्चा, बाकी दिनों से काफी कम या काफी ज्यादा खाना खाने लग जाता है। आपका बच्चा बहुत ज्यादा सोता है या सोता ही नहीं है।अगर आपके बच्चे में भी ये सारे symptoms नजर आ रहे हैं, तो अपने doctor से मिलिए।Source:-1. https://link.springer.com/article/10.1007/s10826-017-0892-42. https://www.researchgate.net/publication/312566114_DETERMINANTS_OF_WORK-LIFE_BALANCE_FOR_WORKING_MOTHERS
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